उमेश ताम्बी

>> Monday, March 23, 2009

फ़िर क्यों ना मेरा भारत महान ??

खरबूजा कांट मृदंग बनाया नींबू कांट मंझिरा , मत्तिरा कांट रंग बनाया जैसे ऊँठ के मुंह जीरा
ना रंग है ना रोली है और ना मस्तानो की टोली है , ना ठंडाई है ना ही हरे रंग की गोली है
वैलेंटाइन और हेलोवीन ही अब बनने लगे हमजोली है ,

फागुन के आते आते आपने हमारी आँखे खोली है
दे दी दिलासा दिल को ....बुरा ना मानो होली है

यादों का मौसम है ऐसा मौसम ,पहलु में जिसके खुशियाँ है और गम
खुशियों तो रहती है घडियाँ गिन-गिन ,जीवन असंभव है दुखों के बिन
भूली बिसरी यादें सताती है प्रतिदिन, मन में ध्वनि वे करती है भिन-भिन
पिचकारी का जल हो या वर्षा का पानी, यादें नई हो या हो पुरानी

1 comments:

Anonymous March 27, 2009 at 1:04 PM  

After a very long time I could hear and enjoy such a good quality Hindi. Thanks to you ..for organizing such a good event. Ajay Padhye (Texas, USA)

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