राकेश खंडेलवाल

>> Monday, March 23, 2009

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राकेश जी हास्य, श्रृंगार और ज्ञान का भंडार है उनकी समय सुचकता और क्षणिक छंदों में परिवर्तित होते हुए शब्दों की प्रस्तुति अचंबित कर देती है..यदि आप तालियाँ बजाना चाहे तो निसंकोच बजा सकते है...

आप शिरमौर्य हैं काव्य के किन्तु मैं कैसे कह दूं कि यह कुछ नई खोज है
आप के हर कवित्त, छंद और शब्द में एक निराला प्रवाह, एक नया ओज है
आप की नम्रता में जो शालीनता है छिपी उस के कायल सभी हो रहे
ऐसा कवि धन्य है कह रहे हैं सभी कि उदय उस का होता नहीं रोज़

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